महाशिवरात्रि पर निबंध eassey on mahashivratri?

हिंदू धर्म के मुख्य देवता भगवान शिव होते हैं। महा शिवरात्रि का त्योहार भी हिंदुओं का ही एक धार्मिक बहुत बड़ा त्यौहार होता है। महाशिवरात्रि के पर्व के पीछे बहुत ही मान्यताएं जुड़ी हुई है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था, इसीलिए महाशिवरात्रि मनाई जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा जी के स्वरूप से ही मध्य रात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था, और शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने तांडव नृत्य करके अपना तीसरा नेत्र भी खोला था और ब्रह्मांड को नेत्र की ज्वाला से ही समाप्त किया गया था।

इन सभी मान्यताओं के कारण ही यह त्यौहार हिंदुओं का बहुत प्रमुख त्यौहार है। इस दिन सभी लोग भगवान शंकर की पूजा उपासना करते हैं। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में ही आती है लेकिन महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि को मार्च के महीने में आती है। आज हिम इस लेख में महाशिवरात्रि पर निबंध लिखने जा रहे हैं…

महाशिवरात्रि पर निबंध eassey on mahashivratri?

महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में

प्रस्तावना

भारत में महाशिवरात्रि का त्यौहार हिंदुओं के लिए एक बहुत ही बड़ा त्योहार माना जाता है यह त्योहार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन होता है इस दिन पूरे धूमधाम से पूरे देश में भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है शास्त्रों के अनुसार जब हमारी सृष्टि का प्रारंभ हुआ था तो भगवान शंकर ब्रह्मा के रूद्र रूप से इस दिन अवतार लिया था और ऐसा भी माना जाता है कि भगवान शिव का विवाह पार्वती जी के साथ इसी दिन हुआ था इसीलिए महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है।

शिवरात्रि का नाम कैसे पड़ा

शिवरात्रि का नाम शिवरात्रि की क्यों पड़ा इस बात के लिए आप अगर शिव पुराण को पढ़ेंगे तो उसने इसकी जानकारी अवश्य मिल जाएगी। क्योंकि शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी प्रकार के जीव जंतुओं के स्वामी है। भगवान शिव सभी जीव जंतु हर प्राणी मात्र के मन में बसे हुए हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव कैलाश पर्वत पर तपस्या में लीन रहते हैं, उसके साथ ही सभी कीड़े मकोड़े भी अपने बिल में बंद हो जाते हैं।

6 महीने के बाद में भगवान शिव धरती पर श्मशान घाट में निवास करते हैं। जब भगवान शिव 6 महीने के बाद में धरती पर श्मशान घाट में निवास करने के लिए आते हैं वह समय फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है, इसलिए इस महान दिन को ही विश्व के सभी भक्तों ने इसको महाशिवरात्रि का नाम दिया। Also Read: महात्मा गांधी की कहानी story of mahatma gandhi?

महाशिवरात्रि का महत्व

महाशिवरात्रि भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा त्यौहार होता है यह भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के लिए समर्पित त्यौहार है। महाशिवरात्रि के दिन आध्यात्मिक और चिकित्सक दोनों ही तरीके की विचारधाराएं लोगों की महत्वपूर्ण मानी जाती है शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के आराधना को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

मंदिरों में रात दिन अलग-अलग उत्सव आयोजित होते हैं और जागरण का भी विशेष आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है ऐसी भी मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले हुए विश्व को भगवान शिव ने संपूर्ण विश्व की रक्षा के लिए अकेले ही पी लिया था इस वजह से उनका कंठ नीला हो गया था तो उनका नाम नीलकंठ भी पड़ गया था।

भगवान शिव के अनेक नाम है सभी लोग उनको अलग अलग नाम से अलग-अलग रूप में भी पूजते हैं। महाशिवरात्रि के दिन सभी शिव के भक्त भगवान शिव की दूध, दही, शहद, बेल्व पत्र, समी पत्र,धतूरा आदि से पूजा करते हैं। हमारे धार्मिक शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के बाहर नंदी की पूजा का रात के समय में बड़ा विधान माना गया है और शिवरात्रि के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है।

इसके अलावा लोग भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र ” श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” का जाप भी करते हैं, अगर मनुष्य इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हैं उससे सभी लोगों से मनुष्य जीवन में बढ़ रही कठिनाइयों से मुक्ति पाने का समाधान मिलता है।

 शिव पार्वती के विवाह की कथा

कहते हैं भगवान शिव और पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि के दिन भी संपन्न हुआ था भगवान शिव त्रिदेव में से एक है और भगवान शिव के अनेक नाम हैं जिनमें से इनको मुख्यतः लोग भोले नाथ भोले शंकर शंकर महेश रूद्र शिव शिवा महादेव आदि नामों से जानते हैं भगवान शिव का धाम कैलाश धाम है ऐसे मुख्य थे वह श्मशान वासी हैं.

भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की उसके बाद ही भगवान शिव के साथ में माता पार्वती की शादी शादी हुई माता पार्वती को उमा गौरी के नाम से भी जाना जाता है जब माता पार्वती का जन्म हुआ था तब ही महर्षि नारद जी ने माता पार्वती के पिता हिमालय राज को इनको देखकर ही कह दिया था कि इन को पति रूप में भगवान शिव से ही विवाह करना पड़ेगा इसलिए माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए बचपन से ही कठोर तपस्या करना प्रारंभ कर दिया था।

उनकी कड़ी तपस्या का परिणाम यह निकला कि अंत में भगवान शिव से इनके शादी हो ही गई। शादी में कठिनाइयां तो बहुत आई थी, लेकिन बिना किसी परेशानी के फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को उनका विवाह हो गया था।

Conclusion

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से आप सभी को महाशिवरात्रि पर निबंध के बारे में बताया है। उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा दी गई यह सभी जानकारी पसंद आई होगी। इससे जुड़ी अन्य किसी भी जानकारी के लिए आप हमारे कमेंट सेक्शन में जाकर कमेंट करके पूछ सकते हैं।